काम, क्रोध और लोभ — ये आत्मा के पतन के तीन नरक द्वार हैं; इसलिए इन्हें त्याग देना चाहिए।
Life Lesson (HI)
वासनाएं, क्रोध और लालच आत्मा को अधोगति की ओर ले जाते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताया गया है कि मनुष्य की आत्मा के पतन के तीन मुख्य कारण होते हैं - काम, क्रोध और लोभ। ये तीनों गुण मनुष्य को नीचे की ओर खिच लेते हैं और उसे दुख में डाल देते हैं। इसलिए इन गुणों को त्यागना बहुत महत्वपूर्ण है।
काम, यानी इच्छाएं और वासनाएं, मनुष्य को अपने लक्ष्यों से भटकाते हैं और उसे अनित्य और अविश्वसनीय भोगों की ओर खींच लेते हैं। क्रोध मनुष्य को असंतुष्टि में डालता है और उसकी विवशता में लेकर उसे अज्ञान और अधर्म की ओर ले जाता है। लोभ मनुष्य को संतुष्टि की भावना से वंचित करता है और उसे अधिक से अधिक अप्राप्ति की लालसा में डाल देता है।
इसलिए, भगवान श्रीकृष्ण हमें समझाते हैं कि हमें इन तीनों गुणों को त्याग करना चाहिए। इन गुणों के वश में रहकर हम आत्मा की उन्नति और सुख की प्राप्ति में बाधा डालते हैं। इसलिए, इन गुणों को नष्ट करके आत्मा के मार्ग पर चलना हमारे लिए उत्तम हो