व्यास की कृपा से मैंने स्वयं योगेश्वर श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन से कही गई इस परम गोपनीय योग विद्या को सुना।
Life Lesson (HI)
सत्संग और गुरु की कृपा से ही दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्त अर्जुन को योगेश्वर कहते हैं। यहाँ उन्होंने अर्जुन को गहन रहस्यमय योग विद्या का ज्ञान दिया है, जिसे उन्होंने व्यास मुनि की कृपा से सीखा है। इस अद्वितीय ज्ञान के माध्यम से भगवान ने अर्जुन को योग का महत्व और उसके साक्षात्कार के लाभों के बारे में बताया है।
यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि दिव्य ज्ञान की प्राप्ति केवल सत्संग और गुरु की कृपा से ही संभव है। हमें गुरु के आदर्शों के प्रति समर्पण और समाधान रखना चाहिए ताकि हम अपने जीवन में सच्ची उन्नति कर सकें और दिव्य ज्ञान का अनुभव कर सकें। गुरु की कृपा से ही हमें आत्मा के उद्देश्य का ज्ञान होता है और हम सही मार्ग पर चलने में सक्षम होते हैं।
इस श्लोक के माध्यम से हमें यह ज्ञान मिलता है कि सत्संग और गुरु के साथ जुड़कर हम अपने जीवन को स्वयं पारित कर सकते हैं और अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए, हमें अपने गुरु का सम्मान करना चाहिए और उनके उपदेशों का