हे पार्थ! ऐसा अनायास प्राप्त युद्ध स्वर्ग के द्वार के समान खुला हुआ है, और ऐसे युद्ध को पाने पर क्षत्रिय ही सुखी होते हैं।
Life Lesson (HI)
सुनहरा अवसर कर्म और धर्म दोनों का द्वार खोलता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि युद्ध का अचानक प्राप्त होना उसे स्वर्ग के द्वार के समान खुला हुआ है, जिसे केवल क्षत्रिय ही सुखी महसूस करते हैं। यहाँ 'युद्ध' का अर्थ न केवल शस्त्रीय युद्ध है, बल्कि हर प्रकार के जीवन में उत्कृष्ट परिस्थितियों का सामना करना भी युद्ध के समान है। इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों का सामना करना हमें आत्मविश्वास और सजीव बनाता है। यह हमें यह भी सिखाता है कि सहायता और आशीर्वाद सिर्फ उसे मिलता है जो संघर्ष करता है और संघर्ष का सामना करता है।