जिसके सभी कर्म इच्छारहित और ज्ञान की अग्नि से दग्ध हो चुके हैं, उसे ज्ञानीजन पण्डित कहते हैं।
Life Lesson (HI)
ज्ञान से प्रेरित कर्म ही सच्ची बुद्धिमत्ता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में श्रीकृष्ण भगवान ज्ञानी और बुद्धिमान पुरुष के लक्षण का वर्णन कर रहे हैं। ज्ञानी व्यक्ति का सभी कार्य इच्छा और कामना से रहित होता है। उसके कर्म ज्ञान की अग्नि से जल जाते हैं, यानी ज्ञान के प्रेरणा से किये गए कर्म सच्चे और निःस्वार्थ होते हैं। इस प्रकार, ज्ञानी व्यक्ति को पण्डित कहा जाता है।
इस श्लोक का मुख्य संदेश है कि ज्ञान और अद्वैत भावना के साथ किए गए कर्म ही सच्ची बुद्धिमत्ता को प्राप्त करने का मार्ग है। ज्ञानी व्यक्ति अपने कर्मों को उच्चतम धार्मिक तत्वों के साथ सम्बोधित करता है और उन्हें समर्पित करता है। इसे श्रद्धा और समर्पण का भाव भी कहा जा सकता है। इस तरह, यह श्लोक हमें उच्च स्तर की सोच, परिश्रम और ईश्वर के प्रति निःस्वार्थ भाव की महत्वता को समझाता है।