बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते। वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः॥19॥
Translation (HI)
अनेक जन्मों के बाद, ज्ञानी मुझे ही सब कुछ मानकर मेरी शरण में आता है — ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ होता है।
Life Lesson (HI)
अनेक जन्मों की साधना के बाद आत्मा पूर्ण समर्पण करती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कह रहे हैं कि जो व्यक्ति अनेक जन्मों के उद्योग से ज्ञानी बनकर सम्पूर्ण ज्ञान को प्राप्त होता है, वह उस अनंत सत्ता वासुदेव में ही सब कुछ देखता है और उसकी शरण में आता है। ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ होता है।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि अनंत जन्मों के साधना और ज्ञान के माध्यम से हमें अपने आत्मा को पूरी तरह से परमात्मा के समर्पण में करना चाहिए। इस भावना के साथ हम जीवन को अर्थपूर्ण और उद्देश्यवान बना सकते हैं और अपनी आत्मा को मोक्ष की ओर ले जा सकते हैं।