अग्नि, प्रकाश, दिन, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण के छः महीने — इन कालों में शरीर त्यागने वाले ब्रह्मज्ञानी ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।
Life Lesson (HI)
शुभ काल में मृत्यु मोक्ष का द्वार बन जाती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण गीता में आत्मा की महत्वता और मोक्ष के मार्ग के बारे में बता रहे हैं। यहां उन्होंने कहा है कि जो व्यक्ति उत्तरायण काल में, जो शुक्ल पक्ष में, और जो दिन और प्रकाश के साथ होते हैं, उस समय अपने शरीर को त्यागते हैं, वे ब्रह्म अर्थात् परमात्मा को प्राप्त होते हैं।
इस भावार्थ में, 'अग्नि' संसार की बुझती हुई दिव्य अज्ञान, 'ज्योति' ज्ञान और उज्ज्वलता, 'शुक्ल' शुद्धता और पवित्रता, 'षण्मासा' छः महीने जिसमें वसंत और ग्रीष्म ऋतु शामिल हैं, 'उत्तरायण' वह काल जब सूर्य उत्तर की ओर जाता है और मौसम शुभ होता है। जब व्यक्ति इन कालों में अपने शरीर को छोड़ता है, तो वह ब्रह्मज्ञानी अर्थात् परमात्मा को प्राप्त होता है।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि समय का महत्व क्या है और कैसे उसे अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए। यह हमें भगवान की ओर ले जाने वाले सही मार्ग के बारे में बताता है ताकि हम अध्यात्मिक उन्नति की दिशा में