धूम, रात्रि, कृष्ण पक्ष और दक्षिणायन के छह महीने — इस मार्ग से मृत्यु को प्राप्त योगी चंद्रमय लोक को पाते हैं और फिर लौटते हैं।
Life Lesson (HI)
कुछ योगी पुनर्जन्म लेते हैं क्योंकि वे पूर्ण मुक्ति को नहीं पाए।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को योगी के जीवन की एक महत्वपूर्ण उपाय बता रहे हैं। यहाँ धूम, रात्रि, कृष्ण पक्ष और दक्षिणायन के छह महीने का उल्लेख किया गया है, जो मृत्यु के मार्ग का संकेत है। यहाँ 'मृत्यु' का अर्थ यहाँ यहाँ जीवन-मृत्यु नहीं, बल्कि संसार से मुक्ति के रास्ते को सूचित करने के लिए उपयोग किया गया है। इस श्लोक में यह कहा गया है कि कुछ योगी पुनर्जन्म को प्राप्त होते हैं, जो इसका संकेत है कि वे पूर्ण मुक्ति तक पहुंच नहीं पाते और फिर भूतल पर वापिस लौटते हैं। इसका अर्थ है कि वे अपने अध्यात्मिक साधनाओं में सफल नहीं हो पाते और फिर संसारिक जन्म-मरण के चक्र में बंध जाते हैं। इस श्लोक से हमें यह समझ मिलता है कि योगी को अध्यात्मिक साधनाओं में निरंतर सफलता की दिशा में अग्रसर होना चाहिए ताकि वह पूर्ण मुक्ति को प्राप्त कर सके।