हे पार्थ! महात्मा लोग मेरी दिव्य प्रकृति को जानकर, एकनिष्ठ भाव से मेरी भक्ति करते हैं।
Life Lesson (HI)
परमात्मा को जानकर ही सच्ची भक्ति उत्पन्न होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो महात्मा लोग हैं, वे दिव्य प्रकृति वाले भगवान की भक्ति करते हैं और उनकी उपासना में एकाग्रचित्त होते हैं। वे भगवान के भूत, भविष्य और वर्तमान में अविनाशी और अनन्त स्वरूप को समझकर उसकी उपासना करते हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखने को मिलता है कि परमात्मा को समझने और उसकी भक्ति में एकाग्रता रखने से ही हमारी आत्मा को शांति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए, हमें सच्ची भक्ति की ओर अग्रसर होना चाहिए और परमात्मा को जानने के लिए उसकी दिव्य प्रकृति को समझना आवश्यक है।