अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥22॥
Translation (HI)
जो भक्तजन मेरी अनन्य भक्ति के साथ निरंतर मुझे स्मरण करते हैं, उनके योगक्षेम की जिम्मेदारी मैं स्वयं उठाता हूँ।
Life Lesson (HI)
सच्चे भक्त की आवश्यकता की पूर्ति स्वयं भगवान करते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण भक्ति की महत्ता को बता रहे हैं। वे कह रहे हैं कि जो भक्तजन मेरी अनन्य भक्ति के साथ निरंतर मुझे स्मरण करते हैं, उनकी योगक्षेम की जिम्मेदारी मैं स्वयं उठाता हूँ। यहाँ 'अनन्य' का अर्थ है जो भक्ति में सच्चे और निष्ठावान हैं, जो केवल भगवान को ही स्मरण करते हैं। भगवान यहाँ प्रतिज्ञा कर रहे हैं कि उन भक्तों की चिंता और सुरक्षा की जिम्मेदारी वह स्वयं उठाएंगे। इस श्लोक से हमें यह सिखने को मिलता है कि भगवान की भक्ति में निष्ठा और आत्मसमर्पण होने पर उनका साथ और सुरक्षा स्वयं भगवान ही देते हैं। इसलिए, जीवन में भगवान की भक्ति और समर्पण के माध्यम से हमें सुरक्षा और समृद्धि प्राप्त होती है।