हे कौन्तेय! जो अन्य देवताओं की श्रद्धा से पूजा करते हैं, वे भी वास्तव में मेरी ही पूजा करते हैं — यद्यपि विधि से भिन्न तरीके से।
Life Lesson (HI)
सभी पूजा अंततः परमात्मा को ही समर्पित होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो भक्त अन्य देवताओं की श्रद्धा से पूजा करते हैं, वे वास्तव में मामेव (भगवान कृष्ण) की ही पूजा करते हैं, हालांकि उन्होंने उसे सही विधि से नहीं किया होता। यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि सभी पूजाओं का अंतिम लक्ष्य एक ही होता है, और वह है परमात्मा की उपासना। इसके अलावा, यह हमें यह भी बताता है कि भगवान को समर्पित होने के लिए किसी विशेष विधि या तरीके की आवश्यकता नहीं होती, मुख्य है कि हमारी भावना और श्रद्धा सही हो। इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि परमात्मा की पूजा में भक्ति और निष्काम कर्म की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।