हे पार्थ! जिनके चित्त मुझमें स्थिर हैं, मैं उन्हें मृत्यु-संसार-सागर से शीघ्र ही उबार लेता हूँ।
Life Lesson (HI)
जो पूर्णतः ईश्वर में लीन होते हैं, वे संसार से मुक्त होते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो भक्त उनके में पूर्ण भक्ति और निष्ठा रखते हैं, उन्हें वह मृत्यु और संसार के समुद्र से शीघ्र ही उद्धार कर लेते हैं। यानी भगवान के प्रेम और आस्था में लीन होने से ही हम संसार के बन्धन से मुक्त हो सकते हैं। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि भगवान के प्रेम और आस्था में रखकर हम संसार के बन्धन से मुक्त हो सकते हैं। इसलिए हमें भगवान की भक्ति और सेवा में समर्पित रहना चाहिए।