जो दुःखों में व्याकुल नहीं होता, सुख में आसक्त नहीं होता, तथा राग, भय और क्रोध से रहित होता है, वह स्थिरबुद्धि मुनि कहलाता है।
Life Lesson (HI)
राग-द्वेष रहित जीवन ही सच्ची स्वतंत्रता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन को समझा रहे हैं कि जो व्यक्ति दुःखों में उलझकर उद्विग्न नहीं होता, सुख में आसक्त नहीं होता, और जो राग, भय और क्रोध से मुक्त होता है, वह धीर, स्थिरबुद्धि वाला मुनि कहलाता है। इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि असली स्थिरता और स्वतंत्रता तभी हो सकती है जब हम अपने मन को राग और द्वेष से दूर रखते हैं और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण में जीवन बिताते हैं। इसके माध्यम से हमें यह समझाया जा रहा है कि आत्म-निरीक्षण, ध्यान और अनुग्रह के साथ हम संसारिक मोहों से मुक्त होकर अद्वितीय आत्मा में लीन हो सकते हैं।