फिर पुण्य ब्राह्मणों और भक्तराजर्षियों की क्या बात! इस अनित्य और दुखमय संसार को पाकर मेरी भक्ति करो।
Life Lesson (HI)
यह संसार अस्थायी है, अतः परम को अपनाओ।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जैसे पुण्य ब्राह्मण और भक्तराजर्षि भक्ति के लायक होते हैं, वैसे ही तुम भी इस अनित्य और दुःखमय संसार को पाकर मेरी भक्ति करो। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जा रही है कि यह संसार अस्थायी है और इसका आनंद अस्थायी है, इसलिए हमें परमात्मा की भक्ति में लगना चाहिए। इससे हम अनंतिक धर्म और शांति को प्राप्त कर सकते हैं। इस भावार्थ के माध्यम से हमें समझाया जा रहा है कि हमें इस अनित्य संसार में मोहित होकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें परमात्मा की भक्ति करके मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होना चाहिए।