Bhagavad Gita • Chapter 13 • Verse 12

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Chapter 13 • Verse 12

Kshetra–Kshetrajna Vibhaga Yoga

अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्। एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा॥12॥
Translation (HI)
आध्यात्मिक ज्ञान में निष्ठा और तत्त्व के बोध की दृष्टि — ये सब ज्ञान हैं; जो इसके विपरीत है, वह अज्ञान है।
Life Lesson (HI)
ज्ञान वह है जो आत्मा की ओर ले जाए, बाकी सब अज्ञान है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मा के साक्षात्कार और आध्यात्मिक ज्ञान का महत्व समझाते हैं। यहाँ कहा गया है कि जो व्यक्ति आत्मा में स्थिर और निष्ठावान है और जो तत्त्व को समझता है, वहीं वास्तविक ज्ञान है। जो इस सत्य से विपरीत है, वह अज्ञान माना जाता है। इस श्लोक का मुख्य संदेश है कि आत्मा की पहचान और आध्यात्मिक ज्ञान ही सच्ची ज्ञान है और इससे दूसरी सभी जानकारियों को अज्ञान माना जाता है। यह श्लोक हमें यह बताता है कि अज्ञान से मुक्ति के लिए हमें आत्मा की पहचान और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति करनी चाहिए। इससे हम अपनी आत्मा की सच्ची पहचान कर सकते हैं और अपने जीवन को एक सार्थक दिशा में ले जा सकते हैं।