रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
Meaning (HI)
श्रीराम ने हनुमान जी की अत्यंत प्रशंसा की और उन्हें भरत के समान अपना प्रिय भाई कहा।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई दर्शाती है कि वेदान्त में सच्ची महानता पद, शक्ति या जन्म से नहीं, बल्कि गुण और समर्पण से आती है। हनुमान जी वानर हैं, फिर भी राम उन्हें अपने भाई भरत के समान मानते हैं—यह आत्मिक समानता का उद्घोष है।
वेदान्त कहता है कि आत्मा में कोई भेद नहीं। जब अहंकार गल जाता है, तब जाति, रूप और भूमिका अर्थहीन हो जाती हैं। हनुमान की महानता उनकी भक्ति और निष्कलुष कर्म में है।
यह चौपाई साधक को सिखाती है कि ईश्वर के निकटता का माप बाहरी पहचान नहीं, बल्कि आंतरिक पवित्रता है।