सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
Meaning (HI)
हजारों मुख भी आपके यश का वर्णन करें, फिर भी वह अपर्याप्त है—ऐसा कहकर श्रीराम हनुमान को हृदय से लगा लेते हैं।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई अनंत गुणों की सीमाहीनता को दर्शाती है। वेदान्त में आत्मा का यश अनंत है—उसे शब्दों में बाँधा नहीं जा सकता। राम का यह कथन हनुमान के अहंकार को नहीं बढ़ाता, बल्कि उनके शून्य-अहं को दर्शाता है।
ईश्वर द्वारा आलिंगन का अर्थ है—पूर्ण तादात्म्य। यहाँ भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं रहती।
यह चौपाई साधक को सिखाती है कि जब अहंकार पूर्णतः लय हो जाता है, तब गुणों की चर्चा भी मौन में बदल जाती है।