The Heroic Destroyer of Ignorance and Companion of Right Intellect
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
Meaning (HI)
हनुमान जी महान वीर और पराक्रमशाली हैं, जिनका शरीर वज्र के समान दृढ़ है। वे कुमति (दुष्ट या भ्रमित बुद्धि) का नाश करने वाले और सुमति (शुद्ध, सही बुद्धि) के सदा संग रहने वाले हैं।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई वेदान्त के मूल संघर्ष को प्रकट करती है—कुमति और सुमति के बीच का युद्ध। वेदान्त के अनुसार दुःख का कारण बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि “कुमति” है: वह बुद्धि जो अविद्या, भय, अहंकार और वासनाओं से ढकी हुई है। हनुमान जी को “महाबीर” कहना उस आन्तरिक वीरता का संकेत है, जो सत्य के लिए अपने ही भ्रमों से युद्ध करती है।
“बिक्रम” केवल बाह्य पराक्रम नहीं, बल्कि निरन्तर अभ्यास से उत्पन्न मानसिक दृढ़ता है। साधक जब अपने पुराने संस्कारों, आलस्य और संशय से टकराता है, तब वही विक्रम आवश्यक होता है। “बजरंगी” वज्र-समान स्थिर चित्त का प्रतीक है—ऐसा मन जो सुख-दुःख, मान-अपमान में विचलित नहीं होता।
“कुमति निवार” यह दर्शाता है कि हनुमान-तत्त्व अज्ञान का विनाश करता है। वेदान्त में अज्ञान का नाश हिंसा से नहीं, विवेक से होता है। जब बुद्धि शुद्ध होती है, तब निर्णय सहज और कर्म बन्धन-मुक्त हो जाते हैं।
“सुमति के संगी” साधक के लिए आश्वासन है—जब मन सत्य, श्रद्धा और सेवा के साथ जुड़ता है, तब सही बुद्धि उसका स्वाभाविक साथी बन जाती है। यह चौपाई सिखाती है कि वास्तविक शक्ति बाहरी विजय में नहीं, बल्कि कुमति पर विजय में निहित है।