तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
Meaning (HI)
हनुमान जी ने सुग्रीव पर महान उपकार किया—उन्हें श्रीराम से मिलवाया और उनका राज्य दिलवाया।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई वेदान्त के करुणा और कर्म-न्याय के सिद्धान्त को दर्शाती है। सुग्रीव यहाँ केवल एक पात्र नहीं, बल्कि वह साधक है जो भय, असुरक्षा और हीनता से ग्रस्त है। वेदान्त कहता है कि जब मन भय में फँस जाता है, तब विवेक धूमिल हो जाता है।
हनुमान जी का उपकार यह है कि वे सुग्रीव को राम से मिलवाते हैं—अर्थात् भयग्रस्त चित्त को उसके आन्तरिक आश्रय से जोड़ देते हैं। राम यहाँ सत्य और स्थिरता के प्रतीक हैं। जब मन सत्य से जुड़ता है, तभी उसका “राज्य” अर्थात् आत्म-नियंत्रण और आत्म-सम्मान पुनः स्थापित होता है।
यह चौपाई साधक को सिखाती है कि सच्ची सहायता दूसरों को अपने सत्य से जोड़ना है, न कि उन्हें आश्रित बनाना। यही करुणा वेदान्त में मुक्तिदायी मानी जाती है।