अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
Meaning (HI)
आप अष्ट सिद्धियाँ और नौ निधियाँ देने वाले हैं—यह वर माता सीता (जानकी) ने आपको दिया है।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई सिद्धि और निधि के विषय में वेदान्त की सावधानी को याद दिलाती है। अष्ट सिद्धियाँ और नौ निधियाँ बाहरी उपलब्धियाँ प्रतीत होती हैं, पर वेदान्त उन्हें साध्य नहीं मानता—वे साधना के मार्ग में आने वाले “उपफल” हैं। यदि साधक इन पर आसक्त हो जाए, तो अहंकार पुनः मजबूत हो सकता है।
यहाँ “जानकी माता” का वर संकेत करता है कि ये शक्तियाँ करुणा और पवित्रता से आती हैं, न कि अहं से। सीता शुद्ध श्रद्धा और निर्मल चित्त का प्रतीक हैं। जब साधक का चित्त सीता-तत्त्व (पवित्रता) से जुड़ता है, तब उसके भीतर क्षमताएँ जागती हैं।
वेदान्त का संदेश यह है: सिद्धि का उपयोग सेवा और धर्म के लिए हो, प्रदर्शन के लिए नहीं। हनुमान में सिद्धियाँ हैं, पर उनका अहं शून्य है—यही उनकी सर्वोच्च सिद्धि है।