जो आपकी शरण में आता है, वह सभी सुख प्राप्त करता है। आपके संरक्षण में किसी को भय नहीं रहता।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई शरणागति के वेदान्तीय अर्थ को स्पष्ट करती है। शरण का अर्थ किसी बाहरी शक्ति पर निर्भर होना नहीं, बल्कि अहंकार को छोड़कर सत्य के प्रति समर्पित होना है। हनुमान यहाँ निर्भयता के प्रतीक हैं—क्योंकि वे स्वयं अहंकार से मुक्त हैं।
वेदान्त कहता है कि भय “मैं” की रक्षा की इच्छा से उत्पन्न होता है। जब “मैं” ढीला पड़ता है, तब भय स्वतः विलीन हो जाता है। हनुमान की शरण का अर्थ है—अपने सीमित कर्तापन को छोड़ देना।
यह चौपाई सिखाती है कि वास्तविक सुरक्षा बाहरी नियंत्रण में नहीं, आन्तरिक समर्पण में है।