Sanctifying the Whole Lineage Through Inner Purity
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥
Meaning (HI)
जो अन्य देवताओं की चिंता न करके केवल हनुमान जी की सेवा करता है, वह सभी सुख प्राप्त करता है।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई एकाग्रता और “एक-निष्ठा” का वेदान्तीय उपदेश देती है। वेदान्त में समस्या यह नहीं कि साधक के पास कम साधन हैं; समस्या यह है कि उसका मन बिखरा हुआ है। “चित्त न धरई” का अर्थ है—मन को अनेक दिशाओं में न बाँटना।
हनुमान-सेवा यहाँ प्रतीक है—ऐसी साधना जो साहस, सेवा, विनय और समर्पण का अभ्यास कराती है। जब मन एक-निष्ठ होता है, तब वह भीतर स्थिर होता है और उसी से “सर्व सुख” प्रकट होता है—जो बाहरी वस्तुओं पर निर्भर नहीं।
यह चौपाई सिखाती है कि सुख का स्रोत बाहर नहीं, एकाग्र और शुद्ध चित्त में है।