जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
Meaning (HI)
हे हनुमान गोस्वामी! आपकी जय हो। आप गुरु के समान कृपा करें।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई हनुमान को गुरु-तत्त्व के रूप में स्थापित करती है। वेदान्त में गुरु वह है जो बाहर कुछ नहीं देता, बल्कि भीतर का अज्ञान हटाता है। “कृपा” का अर्थ चमत्कार नहीं, बल्कि दृष्टि का परिवर्तन है।
“जय” का बार-बार उच्चारण अहं को ढीला करता है—क्योंकि जहाँ स्तुति होती है, वहाँ “मैं” पीछे हटता है। हनुमान की गुरु-कृपा साहस, विवेक और सेवा की प्रेरणा देती है।
यह चौपाई सिखाती है कि सच्चा गुरु वह है जो साधक को अपने पैरों पर खड़ा कर दे, न कि उस पर निर्भर बना दे।