जम कुबेर दिकपाल जहाँ ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥
Meaning (HI)
यम, कुबेर और दिक्पाल भी जिनका यश पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई बताती है कि आत्मिक महिमा किसी पद या शक्ति से सीमित नहीं होती। वेदान्त में जो व्यक्ति स्वयं को कर्ता नहीं मानता, वही अनंत बन जाता है।
हनुमान की पहचान सेवा है, और सेवा में ही उनकी पूर्णता है। यही कारण है कि देवता भी उनके यश की सीमा नहीं बता सकते।
यह साधक को स्मरण कराती है कि जब जीवन अहंकार से मुक्त हो जाता है, तब वही अनंत का द्वार बनता है।