The Divine Messenger Endowed with Infinite Strength
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
Meaning (HI)
हनुमान जी श्रीराम के दूत हैं और अतुलनीय बल के धाम हैं। वे माता अंजनी के पुत्र और पवनदेव के नाम से प्रसिद्ध हैं।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई हनुमान जी के कर्मयोग और शक्ति के वेदान्तीय रहस्य को प्रकट करती है। “रामदूत” शब्द यह स्पष्ट करता है कि उनकी समस्त शक्ति और गति अहंकार से नहीं, बल्कि ईश्वर-आज्ञा से प्रवाहित होती है। वेदान्त में यही आदर्श कर्मयोग है—जहाँ व्यक्ति स्वयं को कर्ता नहीं, बल्कि साधन मानता है।
“अतुलित बल धामा” का अर्थ केवल शारीरिक बल नहीं है। यह वह आन्तरिक शक्ति है जो विवेक, श्रद्धा और आत्म-निष्ठा से उत्पन्न होती है। जब मन द्वन्द्वों से मुक्त होकर लक्ष्य में स्थित होता है, तब साधक के भीतर असीम सामर्थ्य प्रकट होता है।
“अंजनि-पुत्र” हनुमान जी के मानवीय पक्ष को दर्शाता है—वे जन्म से ही दिव्य होते हुए भी माता के गर्भ से उत्पन्न हुए। यह वेदान्त का सन्देश है कि दिव्यता संसार से पलायन नहीं करती, बल्कि उसी में प्रकट होती है।
“पवनसुत” प्रतीक है प्राण-शक्ति का। वेदान्त और योग में प्राण को जीवन-ऊर्जा कहा गया है, जो मन और शरीर को संचालित करती है। हनुमान जी का पवनसुत होना यह दर्शाता है कि जिन्होंने प्राण और मन पर नियंत्रण पा लिया, वे असम्भव को भी सम्भव बना सकते हैं। यह चौपाई साधक को सिखाती है कि जब सेवा, शक्ति और समर्पण एक हो जाते हैं, तब जीवन स्वयं साधना बन जाता है।