आप साधु-संतों के रक्षक और असुरों का नाश करने वाले, श्रीराम के प्रिय हैं।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई साधु और असुर के वेदान्तीय अर्थ को स्पष्ट करती है। साधु वह है जिसका चित्त शुद्ध है; असुर वह प्रवृत्ति है जो अहंकार, क्रोध और लोभ से संचालित होती है। हनुमान जी इन नकारात्मक प्रवृत्तियों के विनाशक हैं।
वेदान्त कहता है कि साधना का उद्देश्य बाहरी युद्ध नहीं, बल्कि आन्तरिक परिष्कार है। हनुमान का संरक्षण उस साधक को मिलता है जो सत्य के पथ पर चलता है।
यह चौपाई सिखाती है कि जब विवेक जाग्रत होता है, तब अज्ञान स्वयं नष्ट हो जाता है।