सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा, नारद, सरस्वती और शेषनाग सभी हनुमान जी के यश का गान करते हैं।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई दर्शाती है कि हनुमान का यश लौकिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक है। वेदान्त में जब ऋषि और देव किसी का स्मरण करते हैं, तो वह चेतना का उच्चतम आदर्श बन जाता है।
हनुमान यहाँ भक्ति, ज्ञान और कर्म का समन्वय हैं—इसलिए सभी मार्गों के साधक उन्हें मानते हैं।
यह साधक को सिखाता है कि संतुलित आध्यात्मिक जीवन सार्वभौमिक होता है।