अंत समय में भक्त श्रीराम के धाम को जाता है और वहाँ हरि का भक्त कहलाता है।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई मृत्यु-भय और अंतिम सत्य पर वेदान्तीय दृष्टि देती है। वेदान्त कहता है कि “अंत काल” केवल शरीर का अंत नहीं; यह हर क्षण है जिसमें पुरानी पहचान टूटती है। जो साधक जीवन भर सत्य का अभ्यास करता है, उसके लिए मृत्यु भी एक संक्रमण मात्र बन जाती है, भय नहीं।
“रघुबर पुर” का अर्थ भीतर का वह अवस्था-लोक भी है जहाँ मन निर्विकार हो जाता है। और “हरि भक्त” कहलाना संकेत है कि व्यक्ति की पहचान ‘मैं’ से हटकर ‘समर्पण’ में स्थिर हो चुकी है।
यह चौपाई सिखाती है कि अंतिम घड़ी का परिणाम अंतिम घड़ी पर नहीं, पूरे जीवन की दिशा पर निर्भर है।