हनुमान जी ने हजारों योजन दूर स्थित सूर्य को मधुर फल समझकर निगल लिया।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई अहंकार और सीमाओं के भ्रम को दर्शाती है। सूर्य यहाँ अहं-तेज का प्रतीक है—वह शक्ति जो स्वयं को सर्वोच्च मानती है। हनुमान का उसे फल समझना दर्शाता है कि आत्म-ज्ञान के सामने अहंकार की कोई वास्तविक सत्ता नहीं रहती।
वेदान्त कहता है कि जब साधक अपनी वास्तविक प्रकृति को पहचान लेता है, तब सीमाएँ स्वतः टूट जाती हैं। यह शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि अज्ञान का स्वाभाविक विलय है।
यह चौपाई सिखाती है कि सच्चा बल भीतर के भ्रम को निगल जाना है।