सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा॥
Meaning (HI)
हनुमान जी ने सूक्ष्म रूप धारण कर माता सीता को दर्शन दिए और फिर भयंकर रूप धारण करके लंका को जला डाला।
Vedanta Explanation (HI)
यह चौपाई वेदान्त के अत्यन्त गूढ़ सिद्धान्त को दर्शाती है—चेतना की अनुकूलन-क्षमता। “सूक्ष्म रूप” का अर्थ केवल आकार में छोटा होना नहीं, बल्कि अहंकार का लय होना है। वेदान्त कहता है कि जब साधक करुणा, विनम्रता और संवेदनशीलता के साथ उपस्थित होता है, तभी सत्य दूसरे के हृदय तक पहुँचता है। माता सीता के सामने हनुमान जी का सूक्ष्म रूप यही सिखाता है कि प्रेम और सहानुभूति में शक्ति को छिपाना पड़ता है।
इसके विपरीत, “विकट रूप” धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक तीव्रता का प्रतीक है। वेदान्त कभी दुर्बलता का समर्थन नहीं करता। जब अधर्म, अहंकार और अन्याय प्रबल हो जाते हैं, तब चेतना को उग्र रूप भी धारण करना पड़ता है। लंका का दहन बाहरी विनाश नहीं, बल्कि आसक्ति, अहं और अविवेक के प्रतीकात्मक दहन का संकेत है।
यह चौपाई सिखाती है कि आत्म-ज्ञानी न तो सदा कोमल होता है, न सदा कठोर—वह परिस्थिति के अनुसार रूप धारण करता है, पर भीतर सदा सम रहता है। यही कर्मयोग का उच्चतम रूप है: आन्तरिक स्थिरता के साथ बाह्य परिवर्तनशीलता।